छत्तीसगढ़

निगम गार्डन में चाट-गुपचुप,समोसा ठेला लगाने का विरोध

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रायपुर
नगर निगम रायपुर का यह प्रस्ताव किसी के गले नहीं उतर रहा जिसमें कल सामान्य सभा में प्रस्ताव ला दिया गया कि मुख्यालय व्हाइट हाउस (महात्मा गांधी सदन) के सामने वाले गार्डन का 5 प्रतिशत हिस्सा 5 साल के लिए निजी हाथों को सौंपा जायेगा। यह एजेंसी गार्डन के इस हिस्से में चाट-गुपचुप के ठेले, पकौड़े इत्यादि के ठेले या स्टॉल लगाएगी। इसी के साथ यह भी तय हो गया कि एक-एक कर शहर के 80 गार्डनों में पांच-पांच फीसदी हिस्सा इसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निजी संस्थानों को दिया जाएगा। भाजपा पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया, वहीं खबर लगते ही शहर के विभिन्न संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए निगम प्रशासन से इस फैसले पर पुर्नविचार करने का आग्रह किया है। सुबह की सैर पर जाने वाले कुछ संगठन के प्रतिनिधि जल्द ही महापौर से मिलेंगे। व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन के लिए क्या एनजीटी की अनुमति ली गई है.यह सवाल भी सामने आ रहा है।

इधर इस संबंध में महापौर एजाज ढेबर ने कहा है कि शहर में 189 गार्डन हैं। इनमें से 80 गार्डन पूरी तरह सुसजिज्त है। मेंटनेंस भी हो रहा है, जिसका खर्च लाखों में है। शेष गार्डनों को भी व्यवस्थित करना है, लेकिन खर्च के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। इस स्कीम से गार्डन आत्मनिर्भर होंगे, यानी मेंटेनेंस का खर्च निकलेगा। गार्डन की सफाई व सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जायेगा।

निगम की ओर से पारित प्रस्ताव में बताया गया है कि एक गार्डन से निगम को न्यूनतम दो लाख रुपए सालाना लाइसेंस फीस मिलेगी। यहां निजी कंपनी गुमटियां बनाएगी, जिनमें गुपचुप, चाट-भेल के ठेले लगेंगे। स्टेज इवेंट होंगे, एजेंसी को विज्ञापन का अधिकार भी मिलेगा।

भाजपा पार्षद और नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पालिका बाजार योजना में व्यावासायिक गतिविधियों के साथ पहुंचने वाले लोगों के लिए गार्डन जैसी संरचना निर्मित करनी है, ना कि गार्डन में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करनी है। इससे गार्डन में गंदगी होगी, भीड़ बढ़ेगी और बाहर चाट-गुपचुप बेचने वालों का रोजगार छिनेगा। भाजपा पार्षद दल के प्रवक्ता मृत्युंजय दुबे ने कहा है कि वातावरण दूषित होगा, बदबू फैलेगी। गंदगी होगी तथा शांति भी भंग होगी, लोग परिवार के साथ गार्डन नहीं जा सकेंगे।