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घर बनाना होगा और महंगा, सीमेंट के दाम बढ़ने की आशंका

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कोलकाता।

सीमेंट की खुदरा कीमतों में अगले कुछ महीनों में फिर से 15-20 रुपये की वृद्धि हो सकती है और यह इस वित्त वर्ष में 400 रुपये प्रति बोरी के अब तक के उच्चतम स्तर को छू सकती है। साख निर्धारित करने वाली एजेंसी क्रिसिल ने गुरुवार को यह कहा। कीमतों में वृद्धि का कारण मांग में तेजी के साथ कोयला और डीजल जैसे कच्चे माल की लागत में वृद्धि है।

क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कीमतों में वृद्धि के बीच उच्च लागत के कारण सीमेंट निर्माताओं की कर पूर्व आय में इस वित्त वर्ष में 100-150 रुपये प्रति टन की गिरावट आएगी। आयातित कोयले (पहली छमाही में सालाना 120 प्रतिशत से ज्यादा) और पेटकोक (80 प्रतिशत अधिक) की कीमतों में हाल की तेजी से बिजली और ईंधन की लागत 350-400 रुपये प्रति टन (लगभग 40 प्रतिशत तक) बढ़ सकती है। सीमेंट की बिक्री चालू वित्त वर्ष में 11-13 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसका कारण पिछले साल तुलनात्मक आधार का कमजोर होना है।

दिल्ली में इस वर्ष नवंबर महीने के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 3,831 मेगावॉट दर्ज की गई। यह किसी भी वर्ष के नवंबर महीने में दर्ज की गई बिजली की सर्वाधिक मांग है। वितरण कंपनियों के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।  बीएसईएस के अधिकारियों ने हालांकि कहा कि सर्दी के मौसम में पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं।

बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार नवंबर, 2020 के दौरान दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग 3,769 मेगावॉट तथा नवंबर, 2019 में 3,631 मेगावॉट थी। एक अधिकारी ने कहा, इस वर्ष नवंबर में बिजली की अधिकतम मांग 3,831 मेगावॉट रही। यह इससे पिछले दो वर्षों के नवंबर महीने के दौरान दर्ज की गई बिजली की अधिकतम मांग से ज्यादा है। यहां तक कि इस वर्ष नवंबर में दर्ज की गई बिजली की अधिकतम मांग दिल्ली में अब तक के किसी भी वर्ष के नवंबर महीने में दर्ज की गई अधिकतम मांग से ज्यादा है।

अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग 2019 और 2020 के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है।  अधिकारियों ने अनुमान जताया है कि इस साल दिसंबर के दौरान दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग दिसंबर 2019 और दिसंबर 2020 में रही अधिकतम मांग को पार करते हुए 5,400 मेगावॉट तक पहुंच सकती है।  पिछले साल, दिसंबर में बिजली की अधिकतम मांग 5,021 मेगावॉट थी  जबकि 2019 में यह 5,343 मेगावॉट थी।