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सीमेंट का विकल्प बनेगा बैक्टीरिया से बना हाइड्रो जेल

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तेजी से बदलता मौसम, बढ़ती गर्मी, समुद्र के किनारे मौजूद इलाकों में बाढ़ का खतरा इत्यादि अब दुनिया को पर्यावरण की चुनौतियां करीब से दिखने लगी हैं। पर्यावरण असंतुलन से पैदा हुए बड़े संकट की प्रमुख वजह सीमेंट-कंक्रीट का अंधाधुंध निर्माण है।
ऐसे में वैज्ञानिकों ने सीमेंट के विकल्प के रूप में बैक्टीरिया से बना एक हाइड्रो जेल तैयार किया है। यह जेल पर्यावरण के लिए बेहतर है और सीमेंट से कहीं ज्यादा सस्ता भी। इसकी मजबूती इतनी है कि 380 किलो का भार हर वर्ग सेंटीमीटर आसानी से झेल सकता है। मतलब सीमेंट और ईंट से बने घरों की बजाय इस जेल से बने घर ज्यादा मजबूत होंगे।

हाइड्रो जेल सीमेंट भी, ईंट भी
बैक्टीरिया से बने हाइड्रो जेल के घरों में पारंपरिक सीमेंट से बने घरों से शोर कम आएगा। ये हाइड्रो जेल सीमेंट भी है और ईंट भी। सीमेंट के विपरीत इस जेल को बनाने में प्रदूषण नहीं होता। इसकी वजह है कि यह हीट की बजाय बैक्टीरिया से फोटोसिंथेसिस, यानी प्रकाश की मदद से तैयार होता है। इस विधि से हाइड्रो जेल बनाने से कार्बन का उत्सर्जन होने की बजाय उसका अवशोषण होता है। सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में चूना तोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली हीट से कार्बन गैसों का उत्सर्जन होता है। बायोकंक्रीट या जेल बनाने वाली कंपनी प्रोमेथस के लॉरेन बर्नेट इसकी प्रक्रिया को बेहद आसान बताते हैं। वे कहते हैं कि इसे बनाने के लिए प्रकाश उत्सर्जित करने वाले डायोड के जरिए पानी से भरे बायोरिएक्टर्स टैंक में बैक्टीरिया तैयार किए जाते हैं। उन्हें अकार्बनिक पोषण दिया जाता है। टैंक को बुलबुलों से भरकर रखा जाता है, जिससे इन्हें कार्बन डाईआॅक्साइड मिलती है। हर 4 से 6 घंटे में बैक्टीरिया दोगुने हो जाते हैं। इन्हें दूसरे टैंकों में डाल दिया जाता है। घंटे भर में क्रिस्टल से भरा हाइड्रो जेल तैयार हो जाता है।

कार्बन उत्सर्जन 90% तक कम होगा
लॉरेन बताते हैं कि इस जेल को सांचे में डालकर मशीन से दबाकर कुछ सेकेंड रखते हैं। इसके बाद इससे ब्लॉक तैयार होने में 8 दिन लगते हैं। दूसरी विधि में इसमें 28 दिन लगा करते थे। कंपनी को उम्मीद है कि बालू में यह जेल मिलाकर भी सीमेंट जैसा पदार्थ तैयार किया जा सकेगा। लॉरेन कहते हैं, इस तरह से कार्बन उत्सर्जन 90% तक कम होगा। अगले साल इसका औद्योगिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इंसानी गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का 8% तो सिर्फ सीमेंट से ही होता है। दुनिया के 800 करोड़ लोगों को घर के साथ साफ पर्यावरण भी चाहिए।

स्टील की जरूरत 70% कम होगी
एक दूसरे शोध के अनुसार, बांस का लचीलापन स्टील से बहुत ज्यादा 28 हजार पाउंड प्रति वर्ग इंच है। इस वजह से इमारतों के निर्माण में स्टील की जगह बांस के इस्तेमाल पर कई शोध चल रहे हैं। इसे इमारतों की कॉलम, बीम, दीवार, छत और सीढ़ियों में सरिया की जगह लगा सकते हैं। इससे 70% स्टील का उपयोग कम हो जाएगा। स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी इमारतों में इस्तेमाल के लिए बांस की क्षमता बढ़ाने पर शोध कर रहा है।